
श्री गजानन महाराज आरती Gajanan Maharaj Aarti
जय जय सत्चितस्वरूपा स्वामी गणराया ।अवतरलासी भूवर जड़ मूढ ताराया । जयदेव जयदेव ॥धृ॥ निर्गुण ब्रह्म सनातन अव्यय अविनाशी । स्थिरचर व्यापुन उरले जे या जगतासी ।तें तू तत्त्व खरोखर नि:संशय अससी । लीलामात्रे धरिले मानवदेहासी ॥१
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